सातत्य की अवधारणा
  • सातत्य की अवधारणा

    ₹200.00Price

    लेखक : जीन लीडलॉफ

    ISBN : 978-81-920957-6-9

    208 pages  |  Paperback

    • About the Book

      "मैं नहीं जानता कि क्या दुनिया को एक पुस्तक से बचाया जा सकता हिअ, परन्तु यदि ऐसा हो सकता तो वो पुस्तक सिर्फ यही हो सकती है।"

      - जॉन हॉल्ट

       

      जीन लीडलॉफ ने दक्षिण अमेरिका के घने जंगलो में पाषाण युगीन इंडियनों - सनेमा और येक्वुआना लोगो के साथ करीब ढाई वर्ष बिताये।  यहाँ उसे हुए अनुभवों ने उसकी उस पष्चिमी अवधारणा को ध्वस्त कर दिया की हमे कैसे रहना चाहिए और उसकी एक अलग धरना बानी की मनुष्य का स्वभाव आखिर है क्या? :हम अपनी पष्चिमी सभ्यता में खुद के स्वभाव को समझ नहीं पाए हैं?" अपनी अवधारणा की पुष्टि के लिए वह पाँचवी बार फिर से गयी और " कन्टीन्युअम कान्सेप्ट" लिखी। उसका मानना है की यह बात तार्किक क्षेत्र में आती ही नहीं कि शिशु के साथ हैसा बर्ताव किया जाये। शिशु पालन पर अपने समय की एक सर्वश्रेष्ठ पुस्तक।

       

      "... अंछू ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया की मुझे तेज़ चलना चाहिए, या अगर में आरामदायक गति से चलूँगी तो मेरी प्रतिष्ठा आहात होगी, कि मेरे कार्य प्रदर्शन से मुझे आँका जा रहा है या रस्ते में लगने  समय पहुंचने के बाद के समय से कम वांछनीय है।"

       - इसी पुस्तक से

       

      "यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हम अपने सहजबोध से इतना दूर हो गए है की अब हम इंसानो को इंसान जैसा व्यहवार करना भी एक पुस्तक से सीखना पद रहा है। पर अगर कोई पुस्तक है जो ऐसा कर सकती है तो वह ;सातत्य की अवधारणा' है।"

      - योरित-अविराम, ओरोविल, सातत्य पालक

       

      जीन लीडलॉफ न्यूयार्क में जन्मी और पाली बढ़ी थी। अपनी स्नातक शिक्षा के बाद वह कर्नेल यूनिवर्सिटी गयी लईकिन बिना कोई डिग्री लिए ही उसने अपनी यात्राएँ शुरू कर दी - पहले वह यूरोप को लेकर आकर्षित हुई और फिर दक्षिण अमरीकी जंगलो में। उनकी यह पुस्तक करीब पंद्रह से अधिल भाषाओ में छप चुकी है।

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