अनुशासित मस्तिष्क
  • अनुशासित मस्तिष्क

    ₹350.00Price

    लेखक : जेफ श्मिट

    ISBN : 978-81-920957-1-4

    346 pages  |  Paperback

    • About the Book

      तुम क्या बनने जा रहे हो? यही एक यक्ष प्रश्न है?

      पेशेवर काम की दुनिया के बारे में इस दिलचस्प पुष्तक में, जेफ़ श्मिट दर्शाता है की कार्यस्थल व्यक्ति की पहचान के लिए एक लड़ाई का मैदान है, जैसे की स्नातक स्कूल, जहाँ पर पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जाता है।  इस पुस्तक के माध्यम से वह यह बताता है की पेशेवर कर स्वाभाविक रूप से राजनैतिक होता है और पेशवरों को रखा ही इसलिए जाता है की वे स्वयं के दृष्टिकोण को गौण रखे और हमेश सख्त "वैचारिक अनुशासन" बनाये रखे।

      यहाँ-वहाँ  दृष्टिकोण कैरियर असंतोष की जड़ में जो छिपा है, वह है, पेशेवर का अपने रचनात्मक काम के राजनैतिक घातक पर नियंत्रण न होना। के पेशेवर सामाजिक कामों में अपना योगदान देकर अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाना चाहते हैं। फिर भी हमारी पेशेवर शिक्षा और नौकरी का ढांचा उन्हें एक अधीनस्थ की भूमिका अपनाने को बाध्य करता है, जिसके कारण पेशेवर लोग चाहकर भी समाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव नहीं ला पाते, जो की व्यक्ति, संगठन और लोकतंत्र की रचनात्मक क्षमता को भी दुर्बल करता है।

      इस पुस्तक के माध्यम से श्मिट बताता है की आज की नैगमिक होती दुनिया में अपने खुद के सामाजिक दृष्टिकोण को बचाये रखने की लड़ाई किसी को भी लड़नी होगी, की एक पेशेवर नौकर होने के क्या मायने होते है, का एक ईमानदार मूल्यांकन कैसे मुक्तिदायक हो सकता है।

      इस पुस्तक को पढ़ने के बाद कोई भी जो अपनी आजीविका के लिया काम करता है, अपने काम के बारे में वैसी सोच नहीं रखेगा, जैसी वो आज रखता है।

       

      अनुक्रमाणिका :

      आभार। भारतीय हिंदी संस्करण के लिए लेखक का अमुख। भारतीय सन्दर्भ में प्रस्तावना। परिचय 1. भीरु पेशेवर 2. वैचारिक अनुशाशन 3. अंदरूनी लोग, मेहमान और घुसपैठिए 4. तयशुदा जिज्ञासा 5. गोपनीयता के खेल का सामाजिक महत्व 6. श्रम विभाजन 7. अवसर 8. राजनैतिक वर्णाली को संकीर्ण बनाना 9. अभिवृति की प्रधानता 10. परीक्षा का परिक्षण 11. निः शुल्क पूर्वाग्रह 12. "निष्पक्ष" आवाजे 13.  अधीनता 14. मतारोपण का विरोख 15. अपने मूल्यों को अक्षुण्ण रखने हुए पेशेवर प्रशिक्षण में बचे रहना 16. अभी या कभी नहीं।

       

      जेफ श्मिट उन्नीस वर्षो तक फिजिक्स टुडे पत्रिका के संपादक रहे जब तक की उन्हें इस परिवर्तनवादी पुस्तक लिखने के लिए नौकरी से निकल न दिया गया।  उन्होंने कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, इस इरविन से भौतिक में पिएचडी की और अमेरिका, सेंट्रल अमेरिका और अफ्रीका में पढ़ाया। वे लॉस ऐंजल्स  में पैदा हुए, पले-बढ़े  और वर्त्तमान में वाशिंगटन डी. सी.  में रहते है।

      आप jeffschmidt@alumi.uci.edu पर उन्हें लिख सकते है।